19 June 2026
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पिता की नोटबुक: 20 साल पुराना वो फॉर्मूला जो आज सामने आया

Father’s Day के मौके पर शर्मा परिवार देहरादून में अपने पुश्तैनी घर में इकट्ठा हुआ था। प्लान बेहद सिंपल था—दोपहर का लंच, फैमिली फोटोज़ और पुरानी यादों के कुछ किस्से।

लेकिन अटारी (attic) की सफाई करते समय 16 साल की Riya को एक अनोखी चीज़ मिली। वो एक धूल से भरी पुरानी नोटबुक थी, जिस पर लिखा था: “जब तक मैं तैयार न हो जाऊँ, इसे न खोलें।” यह हैंडराइटिंग उसके पिता Rajesh Sharma की थी, जो एक सिविल इंजीनियर थे और अपनी पुरानी अलमारी को छोड़कर घर की हर चीज़ ठीक करने के लिए जाने जाते थे।

पूरा परिवार वहाँ इकट्ठा हो गया। रिया मुस्कुराई, “टू लेट, पापा!”

कमरे में हंसी गूँज उठी।

उस डायरी के अंदर लगभग बीस साल पुरानी हाथ से लिखी हुई एंट्रीज़ थीं। कुछ पन्नों पर घर के खर्चों का हिसाब था, तो कुछ पर पुलों (bridges) के स्केच बने थे। लेकिन तभी सबकी नज़र एक अजीब चीज़ पर पड़ी—वहाँ स्टॉक मार्केट के कैलकुलेशंस, तारीखें, परसेंटेज, तीर के निशान और एक लाइन लिखी थी जो बार-बार दोहराई गई थी:

पहले कैपिटल (पूंजी) को बचाओ। रिटर्न्स बाद में आते हैं।

रिया ने ऊपर देखा, “पापा, आपने हमें कभी नहीं बताया कि आप ट्रेडिंग भी करते थे?”

राजेश थोड़ा शर्माए, “मैंने ज़्यादा ट्रेड नहीं किया। मैं ज़्यादातर स्टडी करता था।”

उनके छोटे भाई हँसे, “पूरे बीस साल तक?”

राजेश ने सिर हिलाया, “क्योंकि एक कांसेप्ट ने मेरे इन्वेस्टिंग को देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल दिया था।”

पन्ने के सबसे ऊपर लिखा हुआ था: Position Sizing।

हर कोई किसी पेचीदा या मुश्किल एक्सप्लेनेशन की उम्मीद कर रहा था। लेकिन इसके बजाय, राजेश ने एक बेहद सीधा सवाल पूछा:

“अगर आप अपनी कैपिटल का 50% गंवा देते हैं, तो उस नुकसान की भरपाई करने (Recover) के लिए आपको कितने परसेंट रिटर्न की ज़रूरत होगी?”

किसी ने जवाब नहीं दिया।

रिया ने अंदाज़ा लगाया, “50%?”

राजेश ने सिर हिलाया, “आपको पूरे 100% रिटर्न की ज़रूरत होगी।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

उन्होंने बात जारी रखी, “ज़्यादातर लोग सिर्फ जीतने वाले स्टॉक्स ढूंढने पर ध्यान लगाते हैं। जबकि उन्हें सबसे पहले नुकसान देने वाले ट्रेड्स में टिके रहने (Survive करने) पर फोकस करना चाहिए।”

फिर उन्होंने नोटबुक खोली और वो पुराना फॉर्मूला दिखाया:

Position Size = Account Risk ÷ Trade Risk

रिया ने भौहें सिकोड़ीं, “यह सुनने में काफी टेक्निकल लग रहा है।”

“है तो सही,” राजेश ने कहा, “लेकिन यह उतना ही सिंपल भी है।”

उन्होंने समझाया: अगर आपकी कुल कैपिटल ₹5,00,000 है और आप हर ट्रेड पर सिर्फ 1% का रिस्क लेते हैं, तो आपका Account Risk हुआ ₹5,000। अब अगर चार्ट पर आपका स्टॉप लॉस एंट्री प्राइस से ₹10 नीचे है, तो इस फॉर्मूले के हिसाब से आपकी Position Size हुई 500 शेयर्स।

“ओह, तो इसका मतलब रिस्क के हिसाब से हमारी क्वांटिटी (शेयर्स की संख्या) बदल जाती है?” रिया ने पूछा।

“बिल्कुल सही!” उन्होंने कहा।

राजेश ने डायरी का एक और पन्ना पलटा। वहाँ कई एंट्रीज़ ऐसी थीं जहाँ नुकसान (Losses) हुए थे। रिया हैरान रह गई।

“आपको इतने सारे नुकसान भी हुए थे?”

राजेश हँसे, “बिल्कुल! हर ट्रेडर को होते हैं।”

परिवार को लगा था कि वे अपने बड़े मुनाफ़े (Profits) की बात करेंगे, लेकिन इसके बजाय राजेश ने उन नुकसानों की तरफ इशारा किया।

“इन्हीं नुकसानों की वजह से मैं आज तक मार्केट में टिका रहा।”

उन्होंने समझाया कि कई समझदार ट्रेडर्स One Percent Rule को फॉलो करते हैं, जहाँ एक ट्रेड पर मैक्सिमम रिस्क कुल कैपिटल का सिर्फ 1% से 2% ही रखा जाता है। यह तरीका किसी भी एक बड़ी गलती से होने वाले भारी नुकसान से बचाता है।

फिर उन्होंने एक और फॉर्मूला लिखा:

Risk Reward Ratio = Potential Profit ÷ Potential Loss

“अगर कोई ट्रेड ₹1 का रिस्क लेकर ₹3 कमाने का मौका देता है, तो वो 3:1 का रेशियो है,” उन्होंने कहा। “अगर आपकी विन रेट (Win Rate) परफेक्ट नहीं भी है, तो भी सही रिस्क मैनेजमेंट आपको लॉन्ग टर्म में बचाए रखता है।”

रिया उस नोटबुक को देखती रह गई, “तो इन्वेस्टिंग का मतलब हमेशा सही होना नहीं है?”

राजेश मुस्कुराए, “बिल्कुल नहीं! इसका असली मतलब यह है कि जब आप गलत साबित हों, तब आप स्थिति को कैसे मैनेज करते हैं।”

अटारी की खिड़की से धूप अंदर आ रही थी। अब कोई भी बाज़ारी तोहफों के बारे में नहीं सोच रहा था।

रिया ने ध्यान से नोटबुक बंद की, “इतने सालों से मुझे लगता था कि इन्वेस्टिंग का मतलब सिर्फ एक परफेक्ट स्टॉक ढूंढना होता है।”

राजेश ने मना करते हुए सिर हिलाया, “परफेक्ट स्टॉक जैसी कोई चीज़ नहीं होती। परफेक्ट रिस्क प्लान सबसे ज़्यादा मायने रखता है।”

उनके भाई मुस्कुराए, “तो इतने सालों से आपका सीक्रेट वेपन स्टॉक पिकिंग नहीं था?”

“नहीं,” राजेश ने कहा, “यह सिर्फ Position Sizing थी।”

अटारी से नीचे उतरने से पहले उन्होंने एक आखिरी बात जोड़ी: जब आप पोजीशन साइज़िंग, रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो और कैपिटल मैनेजमेंट जैसे कांसेप्ट्स सीखते हैं, तो सिंपल टूल्स इस सफर को बहुत आसान बना देते हैं। Navia All In One App जैसे platforms, investors को अपनी पोजीशंस को track करने और रिस्क को efficiently manage करने में मदद करते हैं।

उस शाम, पूरे परिवार ने फादर्स डे की एक खूबसूरत तस्वीर खिंचवाई। लेकिन असली तोहफा वो तस्वीर, वो लंच या वो पुरानी डायरी नहीं थी।

असली तोहफा तो 20 सालों से लिखा जा रहा वो सबक था:

पैसों को बढ़ाने से पहले, उन्हें सुरक्षित रखना ज़रूरी है।

और ठीक वैसे ही जैसे एक पिता सबसे पहले अपने परिवार की हिफाज़त करता है, एक स्मार्ट ट्रेडर हमेशा अपने कैपिटल की रक्षा सबसे पहले करता है।

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