ग्रोथ का गिफ़्ट: चिल्ड्रन्स डे पर किया गया एक वादा

इनवेस्टिंग का वादा, नदी किनारे
चिल्ड्रन्स डे का दिन था, प्रयागराज में नवंबर की एक गर्म दोपहर। शाम के टाइम संगम घाट डूबते सूरज में चमक रहे थे, और परिंदे उड़ रहे थे। नदी की धीमी आवाज़ के बीच, रीतिका सीढ़ियों पर बैठी अपनी छ: साल की बेटी, मीरा को देख रही थी। तभी उनके हस्बैंड अनिल दो गिलास लस्सी लेकर उनके पास आए।
अनिल ने रीतिका को एक घूँट देते हुए कहा, “देखो, कितनी तेज़ी से बढ़ रही है यह! लास्ट चिल्ड्रन्स डे पर तो बस लड़खड़ा कर चल रही थी, और अब तो सीधे क्लास 1 में आ गई।”
रीतिका ने थोड़ी उदास होकर स्माइल किया। “और जल्दी ही इसे स्कूल फ़ीस, कॉलेज, हो सकता है बाहर जॉब के लिए भी पैसे चाहिए होंगे।”
अनिल ने सोचा और बोले, “तुम सही कह रही हो। चलो आज हम इसके सिर्फ़ सपनों को नहीं, इसके फ़्यूचर को भी एक प्रॉमिस देते हैं। कुछ ऐसा शुरू करते हैं जो इसके साथ-साथ बढ़े।”
रीतिका ने उत्सुक होकर आइब्रो उठाई। “तुम्हारा मतलब क्या है?”
“हम इन्वेस्ट करते हैं। सिर्फ़ सेविंग नहीं। मैंने पढ़ा है कि टाइम के साथ इन्वेस्टमेंट महंगाई को भी मात दे देते हैं और बच्चे के फ़्यूचर के लिए एक अच्छा-ख़ासा कॉर्पस बना सकते हैं।”
रीतिका ने सिर हिलाया, उसकी आँखों में दिलचस्पी दिखी। “पर मुझे हमेशा लगा है कि इन्वेस्टिंग बहुत रिस्की होती है।”
अनिल मुस्कुराए। “इसीलिए हम स्मार्ट, लॉन्ग-टर्म प्लान्स चुनेंगे।”
मीरा के कल के लिए बीज बोना
वे घाट के किनारे-किनारे चलने लगे। मीरा कूदती हुई आगे चल रही थी और फूल की पंखुड़ियाँ उछालकर हँस रही थी। अनिल ने बात जारी रखी, “देखो, यह कैसे पंखुड़ियाँ नदी में फेंक रही है, भरोसा करके कि वह इन्हें बहा ले जाएगा? इन्वेस्टिंग में भी यही है, आप जल्दी प्लांट करते हो और टाइम को उसे बढ़ाने देते हो। जितनी जल्दी हम शुरू करेंगे, रिजल्ट उतना स्ट्रॉन्ग होगा।”
रीतिका ने बेटी को देखा और कहा, “यह बात तो सही है। मेरे भाई ने भी कहा था कि बच्चे के फ़्यूचर के लिए हम छोटे अमाउंट से भी शुरू कर सकते हैं।”
अनिल ने कहा, “हाँ। जैसे, अगर हम इसकी हायर एजुकेशन का टारगेट रखें, जो 15 साल बाद बहुत कॉस्टली होगी, तो हम सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं, जैसे मंथली, ताकि ग्रोथ कम्पाउंड होती रहे।”
रीतिका ने आह भरी। “मुझे यह आइडिया पसंद आया। छोटे स्टेप्स, लंबी जर्नी। पर हम रिस्क को कैसे बैलेंस करेंगे? मैं नहीं चाहती कि इसका पैसा ऐसे ही गायब हो जाए।”
अनिल ने सिर हिलाया। “हम समझदारी से चुनेंगे। कुछ सेफ़र इंस्ट्रूमेंट्स और कुछ इक्विटी को मिक्स करेंगे। मीरा के फ़्यूचर जैसे बहुत लंबे टाइम-होराइजन के लिए, इक्विटी महंगाई (inflation) को हरा सकती है। और जैसे-जैसे यह बड़ी होगी, हम रिव्यू करते रहेंगे। यह एक दिन का गिफ़्ट नहीं है, यह लाइफ़-लॉन्ग प्रॉमिस है।”

बेटी के साथ असली बातचीत
घर वापस आकर, मीरा उनकी गोद में कूद गई।
रीतिका ने उसे गले लगाया। “स्वीटहार्ट, हम तुम्हारे पैसों को बढ़ने में हेल्प करेंगे ताकि तुम अपने ड्रीम्स को चेज़ कर सको।”
मीरा की आँखें बड़ी हो गईं। “ग्रो मनी? सीड्स की तरह?”
अनिल ने टेबल पर रखा एक छोटा सा पौधा उठाया और मीरा के सामने रख दिया। “बिल्कुल वैसे ही। हमने इसे कुछ दिन पहले लगाया था। इसी प्लांट की तरह, हम तुम्हारे नाम पर हर महीने थोड़े-थोड़े पैसे प्लांट करेंगे।
सालों बाद, यह एक पेड़ बन सकता है, ताकि तुम इससे जो चाहो वो कर सको — बाहर पढ़ने जाओ, अपना बिज़नेस शुरू करो, ट्रैवल करो।”
मीरा ने सिर हिलाया और प्लांट को थपथपाया। “ओके डैड।”
रीतिका ने जोड़ा, “हम अच्छे इंस्ट्रूमेंट्स चुनेंगे, चाइल्ड-फोकस्ड म्यूचुअल फ़ंड्स, हो सकता है कुछ लॉन्ग-टर्म प्लान्स।
और हम तुम्हें रास्ते में सिखाते भी रहेंगे ताकि तुम सिर्फ़ खर्च करना नहीं, बल्कि समझना भी सीखो।”
अनिल मुस्कुराए। “सही बात है। फ़ायदा डबल है; तुम्हारा पैसा बढ़ता है, और तुम सीखती हो। तुम देखोगी कि इन्वेस्टिंग की आदत, सब्र और डिसिप्लिन ठीक वैसे ही काम करती है जैसे रोज़ इस पौधे को पानी देना।
और इसे और ईज़ी बनाने के लिए, हम NaviaAllInOneApp यूज़ कर सकते हैं, मेरे डैड भी इसे यूज़ करते हैं।
यह हमें इन्वेस्टमेंट मैनेज करने, गोल्स ट्रैक करने और चीज़ों को सिम्पल रखने में हेल्प करता है, भले ही हम अपने प्लान्स को बड़ा कर रहे हों।”

तारों के नीचे उनका वादा
उस रात, फ़ैमिली बाहर बैठी थी। आसमान में तारे चमक रहे थे। मीरा, जो थोड़ी थक गई थी, अपनी माँ की गोद में सिर रखकर आराम कर रही थी।
रीतिका ने अनिल का हाथ पकड़ा। “अब मुझे हल्का महसूस हो रहा है। हमारे पास अब चिंता नहीं, बल्कि एक दिशा है।”
अनिल ने कहा, “हाँ, हम स्टेबल तरीके से इन्वेस्ट करेंगे, टाइम-टू-टाइम रिव्यू करेंगे, और मीरा के फ़्यूचर को खिलने देंगे।”
मीरा ने जम्हाई ली। रीतिका ने उसे थपथपाया, “क्योंकि हमने तुम्हारे लिए जल्दी शुरू कर दिया। और एक दिन तुम हमें थैंक यू बोलोगी कि हमने इंतज़ार नहीं किया।”
रात की शांति में, शहर सो रहा था लेकिन उनके सपने जाग रहे थे।
ठीक वैसे ही जैसे बाहर लगा उनका छोटा सा पौधा बड़ा होगा, वैसे ही उसकी क्षमता बढ़ेगी, और यह इन्वेस्टमेंट जो उन्होंने इस चिल्ड्रन्स डे पर शुरू किया था, उसकी पूरी लाइफ़ का एक शांत साथी बनेगा।
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